भविष्य के विश्व का निर्माण ऐसे समाजों द्वारा किया जायेगा जो विज्ञान और नवाचार में निवेश करेंगे। ग्रैंड चैलेंजेज वार्षिक बैठक के उद्घाटन समारोह में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपने मुख्य भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा यह कार्य दूरदृष्टि अपनाकर ही किया जा सकता है। इसलिए विज्ञान और नवाचार में काफी पहले से ही निवेश शुरू कर दिया जाना चाहिए, तभी सही समय पर इसका फायदा उठाया जा सकेगा। नवाचार का मार्ग सहयोग और जनभागीदारी से तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, बन्द कमरों में विकसित नहीं हो सकता और ग्रैंड चैलेंजेज जैसे कार्यक्रम इसी सोच पर आधारित हैं। भारत में सशक्त वैज्ञानिक समुदाय है और ऐसी अच्छी वैज्ञानिक संस्थाएं हैं जो हमारे लिए बड़ी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने कोरोना संक्रमण के प्रकोप के दौर में बड़ी अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कंटेनमेंट की नीति से लेकर क्षमता निर्माण तक इन संस्थाओं ने शानदार उपलब्धियां हासिल की है। कोविड महामारी से संघर्ष में मिली सफलताओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में रोजाना महामारी के रोगियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है और देश ने 88 प्रतिशत की स्वस्थ होने की सर्वोच्च दर हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भारत उन देशों में शामिल था जिन्होंने सबसे पहले लॉकडाउन लागू किया और मास्क के उपयोग को बढ़ावा दिया। भारत ने रोगियों के सम्पर्क में आये लोगों का पता लगाने और रैपिड एंटीजन टेस्ट में भी पहल की, साफ सफाई और देश में शौचालयों की संख्या बढ़ाने जैसे उपायों से गरीबों और उपेक्षितों को महामारी से बचाने में बड़ी मदद मिली। तीन दिन की ग्रैंड चैलेंजेज वार्षिक बैठक में विश्व के अनेक नेता भाषण करेंगे। इसके अलावा विभिन्न विषयों पर परिचर्चाओं और अनौपचारिक बातचीत के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जायेगा।